जैन समाज में बढ़ती कटुता और दबाव की प्रवृत्ति चिंताजनक

चंदेरी मेरी मातृभूमि है। वहीं अपनी पैतृक भूमि पर मैंने अपने प्रयासों से एक जिनालय का निर्माण कराया, जो आज “सर्वोदय तीर्थ आदिश्वरम” के नाम से विख्यात है। यह जिनालय “तीर्थंकर ऋषभदेव सर्वोदय फाउंडेशन” ट्रस्ट के अंतर्गत निर्मित है, जो विधिवत मध्यप्रदेश शासन द्वारा पंजीकृत संस्था है। इस जिनालय का

akhil bansal

डा. अखिल बंसल

जैन समाज में बढ़ती कटुता और दबाव की प्रवृत्ति चिंताजनक

चंदेरी मेरी मातृभूमि है। वहीं अपनी पैतृक भूमि पर मैंने अपने प्रयासों से एक जिनालय का निर्माण कराया, जो आज “सर्वोदय तीर्थ आदिश्वरम” के नाम से विख्यात है। यह जिनालय “तीर्थंकर ऋषभदेव सर्वोदय फाउंडेशन” ट्रस्ट के अंतर्गत निर्मित है, जो विधिवत मध्यप्रदेश शासन द्वारा पंजीकृत संस्था है। इस जिनालय का भव्य पंचकल्याणक वर्ष 2013 में आचार्य श्री विमर्श सागर जी ससंघ एवं पूज्य कानजी स्वामी के अनन्य भक्त डॉ. हुकमचंद भारिल्ल के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ था। मेरी आस्था दिगंबर मुनिराजों के प्रति जितनी गहरी है, उतनी ही श्रद्धा पूज्य श्री कानजी स्वामी के प्रति भी है। विगत लगभग 50 वर्षों से मैं टोडरमल स्मारक जैसी विराट संस्था से जुड़ा हूं, जिसका संचालन कानजी स्वामी के अनुयायियों द्वारा किया जाता है।पूज्य आचार्य श्री विद्यानंद जी के निकट रहकर उनके बताए इस मंत्र को

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