ईरान से वार्ता के बाद तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित, ऊर्जा आपूर्ति को बल

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नई दिल्ली, 17 मार्च: भारत ने ईरान के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की है। इस पहल को भारत की एक महत्वपूर्ण राजनयिक सफलता माना जा रहा है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पुष्टि की है कि ईरान के साथ हुई बातचीत के “कुछ परिणाम” सामने आए हैं, जिससे भारतीय जहाजों के लिए इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरना आसान हुआ है।

हाल ही में भारत के दो प्रमुख गैस टैंकर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर सुरक्षित रूप से भारतीय तट पर पहुंच गए हैं। इसके अलावा ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ जैसे अन्य टैंकरों को भी सुरक्षित मार्ग प्रदान किए जाने की जानकारी सामने आई है।

सरकार का मुख्य फोकस देश में एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और कच्चे तेल की आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है। वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में लगभग 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए भारत लगातार ईरान के संपर्क में बना हुआ है।

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी जहाजों के लिए कोई औपचारिक “ब्लैंकेट एग्रीमेंट” नहीं हुआ है। प्रत्येक जहाज की आवाजाही के लिए अलग-अलग स्तर पर समन्वय किया जा रहा है।

इसके साथ ही, भारत सरकार ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि ईरान ने अपने टैंकरों की रिहाई के बदले भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने की शर्त रखी है। सरकार ने इन खबरों को “आधारहीन” बताया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आपूर्ति व्यवस्था स्थिर बनी रहेगी।

समाचार संकलन – यश जयसवाल (प्रशिक्षु, मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़) 

YASH JAYSWAL
Author: YASH JAYSWAL

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