✍️ संपादकीय, डा. अखिल बंसल
नया वर्ष नई संभावनाओं और नए संकल्पों का संदेश लेकर आता है। आज जब भारत स्वयं को “नया भारत” कहकर वैश्विक मंच पर स्थापित करने की ओर अग्रसर है, तब यह विचार आवश्यक हो जाता है कि यह नयापन केवल तकनीक, अर्थव्यवस्था और भौतिक प्रगति तक सीमित न रहे। राष्ट्र का वास्तविक उत्थान तभी संभव है, जब विकास के साथ मानवीय मूल्य, नैतिकता और संवेदनशीलता भी समान रूप से आगे बढ़ें। इस दिशा में युवा पीढ़ी की भूमिका निर्णायक है।
भारत का युवा आज शिक्षा, विज्ञान, स्टार्टअप, खेल और नवाचार के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियाँ प्राप्त कर रहा है। यह उपलब्धियाँ गर्व का विषय हैं, परंतु साथ ही यह प्रश्न भी महत्वपूर्ण है कि क्या इस तेज़ प्रगति की दौड़ में संयम, सहिष्णुता और सामाजिक उत्तरदायित्व पीछे तो नहीं छूट रहे? नववर्ष आत्ममंथन का अवसर देता है और इसी संदर्भ में जैनधर्म का जीवन-दर्शन युवा भारत को संतुलित दिशा प्रदान करता है।
जैनधर्म का मूल सिद्धांत अहिंसा आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा से बचने तक सीमित नहीं, बल्कि विचार, वाणी और व्यवहार की शुद्धता का संकल्प है। प्रतिस्पर्धा के युग में आगे बढ़ना आवश्यक है, परंतु यदि सफलता दूसरों को कुचलकर प्राप्त की जाए, तो वह टिकाऊ नहीं होती। विशेषकर सोशल मीडिया के दौर में बढ़ती कटुता, वैचारिक आक्रामकता और असहिष्णुता के बीच अहिंसा युवा चेतना के लिए नैतिक मार्गदर्शक बन सकती है।
अपरिग्रह का सिद्धांत उपभोगवाद से ग्रस्त समाज में विशेष महत्व रखता है। अधिक पाने की लालसा ने मानसिक तनाव, असंतोष और असमानता को जन्म दिया है। जैन दर्शन सिखाता है कि आवश्यकता और संग्रह में अंतर समझना ही जीवन की समझदारी है। सीमित साधनों में संतोष और आत्मसंयम ही व्यक्ति को भीतर से सशक्त बनाते हैं और समाज को संतुलित रखते हैं।
इसी प्रकार अनेकांतवाद विविधताओं से भरे भारतीय समाज के लिए वैचारिक आधार है। यह सिखाता है कि सत्य एकांगी नहीं होता। मतभेद स्वाभाविक हैं, परंतु संवाद और सहिष्णुता के बिना लोकतंत्र सुदृढ़ नहीं रह सकता। युवा भारत यदि अनेकांत की दृष्टि अपनाए, तो असहमति टकराव नहीं, समाधान का माध्यम बन सकती है।
नया भारत तभी वास्तविक अर्थों में सशक्त बनेगा, जब उसका युवा केवल दक्ष और महत्वाकांक्षी ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, नैतिक और जिम्मेदार नागरिक भी होगा। पर्यावरण संरक्षण, जीवदया, ईमानदार जीवन और सामाजिक उत्तरदायित्व—ये जैन मूल्यों से प्रेरित ऐसे तत्व हैं, जो भारत को केवल आर्थिक शक्ति नहीं, बल्कि नैतिक मार्गदर्शक राष्ट्र बना सकते हैं।
नववर्ष पर यही संकल्प हो—
प्रगति के साथ संयम,
सफलता के साथ संवेदना
और शक्ति के साथ सद्भाव।
यही जैन मूल्यों से प्रेरित नया भारत है।









