नासिक, महाराष्ट्र। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के नासिक स्थित बीपीओ यूनिट से जुड़े यौन उत्पीड़न और जबरन धार्मिक परिवर्तन के मामले में जांच तेज हो गई है। राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों ने इसे गंभीरता से लेते हुए बहुस्तरीय कार्रवाई शुरू कर दी है।
नासिक पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल, जिसकी अगुवाई एसीपी संदीप मिटके कर रहे हैं, वर्ष 2022 से मार्च 2026 के बीच हुई घटनाओं की जांच कर रहा है। अब तक सात कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें टीम लीडर और एचआर विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में एचआर मैनेजर का नाम निदा खान बताया गया है। आरोपों में शादी का झांसा देकर यौन शोषण, छेड़छाड़ और अपराध में सहयोग जैसी धाराएं शामिल हैं।
पुलिस ने एक सप्ताह तक गुप्त ऑपरेशन चलाया, जिसमें सात महिला पुलिसकर्मियों ने नए कर्मचारियों के रूप में दफ्तर में प्रवेश कर साक्ष्य जुटाए। मामले में अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिकिंग और संगठित नेटवर्क के संकेत मिलने पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और राज्य के एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) को भी जानकारी दी गई है।
आठ महिलाओं और एक पुरुष द्वारा दर्ज शिकायतों में एक संगठित नेटवर्क के तहत कर्मचारियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया है। पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि उन पर धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए दबाव डाला गया, जैसे—बीफ खाने, नमाज पढ़ने और रमजान के रोज़े रखने के लिए मजबूर करना। साथ ही, एचआर विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप भी लगे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने 78 से अधिक ईमेल और संदेश भेजे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है, जिसमें साधना जाधव भी शामिल हैं। समिति 18 अप्रैल को नासिक में स्थल निरीक्षण करेगी।
टीसीएस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा है कि कंपनी इस मामले को “अत्यंत गंभीरता” से ले रही है और सभी आरोपियों को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस प्रकरण को “बहुत गंभीर” बताते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
यह मामला फिलहाल जांच के अधीन है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
– यश जयसवाल (प्रशिक्षु, मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़)







