(माला कुमारी की कलम से)
क्या आपने कभी सोचा है कि देश के सर्वोच्च सदन संसद में कोई नेता ऐसी किताब का हवाला दे दे, जो कभी छपी ही न हो? जी हां, ठीक यही हुआ है! राहुल गांधी ने हाल ही में संसद में जनरल एमएम नरवणे की किताब का हवाला देकर सरकार पर निशाना साधा, लेकिन हकीकत यह है कि वो किताब अस्तित्व में ही नहीं है। खुद जनरल नरवणे साहब ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। एक वीडियो में वे स्पष्ट कहते हैं, “ऐसी कोई किताब नहीं है, यह गलत जानकारी है।”यह घटना राहुल गांधी के देशहित के मुद्दों पर अप्रोच की पोल खोलती है। जहां एक तरफ देश की सुरक्षा, सेना और राष्ट्रीय हितों पर बहस होनी चाहिए, वहीं वे फैक्ट-चेक तक न करने वाली जल्दबाजी में संसद को गुमराह करने का प्रयास करते हैं। क्या यह जिम्मेदारी है विपक्ष के नेता की? संसद देश का मंदिर है, वहां झूठे कोट लगाना न सिर्फ गैरजिम्मेदाराना है, बल्कि सेना के सम्मान पर भी चोट करता है। जनरल नरवणे जैसे योद्धा, जिन्होंने देश की रक्षा की कमान संभाली, उनके नाम का दुरुपयोग?देशवासियों, सोचिए! जब देशहित के सवाल उठते हैं – चाहे वो सीमा सुरक्षा हो, आतंकवाद हो या सैन्य तैयारियां – तब राहुल गांधी का यह रवैया कितना खतरनाक है। फैक्ट्स की अनदेखी कर राजनीतिक लाभ के लिए सेना को घसीटना, यह लोकतंत्र का अपमान है। ऐसी गैरजिम्मेदारी बर्दाश्त नहीं।









