कोलकाता। विशेष व्यापक पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है। मसौदा मतदाता सूची जारी होने के बाद से जहां बड़ी संख्या में नामों को “अजुडिकेशन लिस्ट” में डाले जाने पर लोग नाराज हैं, वहीं राजनीतिक दल इसे चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा बना चुके हैं।
दक्षिण 24 परगना में युवक की मौत के बाद प्रदर्शन
दक्षिण 24 परगना जिले के उस्ती क्षेत्र में बुधवार को एक युवक रफीक अली गाजी की मौत के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। परिजनों ने बताया कि मसौदा मतदाता सूची में उसका नाम जांच सूची में आने से वह मानसिक रूप से काफी परेशान था। इसी तनाव में उसने आत्महत्या कर ली।
घटना के बाद टीएमसी समर्थकों ने शव के साथ उस्ती में प्रदर्शन किया। यह इलाका मग्राहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में आता है, जो डायमंड हार्बर पुलिस जिले के अधीन है। डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी करते हैं।
टीएमसी ने सोशल मीडिया पर कहा कि पार्टी के प्रतिनिधि अभिषेक बनर्जी के निर्देश पर परिवार से मिलने पहुंचे और उन्हें सांत्वना दी। पार्टी ने आरोप लगाया कि युवक ने सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए थे, इसके बावजूद उसका नाम अंतिम सूची से बाहर रखा गया, जिससे वह गंभीर तनाव में आ गया।
उत्तर 24 परगना के देगंगा में भी विरोध
उत्तर 24 परगना जिले के देगंगा इलाके में भी बुधवार को लोगों ने SIR प्रक्रिया के खिलाफ विरोध किया। आरोप है कि एक ही बूथ के 80 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम “अजुडिकेशन लिस्ट” में डाल दिए गए हैं, जिसके कारण स्थानीय नागरिकों में भारी असंतोष है।
28 फरवरी 2026 को जारी हुए मसौदा मतदाता सूची में कुल 7.04 करोड़ मतदाताओं के नाम दर्ज किए गए हैं। इनमें से लगभग 60 लाख नाम न्यायिक अधिकारियों द्वारा जांच के लिए चिन्हित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 6 मार्च से धरने पर बैठेंगी
विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और SIR को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की है कि वह 6 मार्च से कोलकाता में SIR के विरोध में धरने पर बैठेंगी।
मंगलवार को कोलकाता में एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य के लगभग 1.2 करोड़ लोग अपने मताधिकार खोने की कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग “चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है” और जनता इसका जवाब देगी।
CPI(M) ने भी चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया
बुधवार को कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के बाहर CPI(M) ने प्रदर्शन किया। पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि 60 लाख मतदाताओं को अजुडिकेशन सूची में डालना “राज्य की प्रशासनिक विफलता” है।
सलीम ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट को SIR के अंतिम चरण में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का निर्देश इसलिए देना पड़ा क्योंकि राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच “भरोसा खत्म हो चुका” है।
उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में चुनाव अब लोगों के लिए कष्टदायक प्रक्रिया बन गया है।”
राजनीतिक तापमान बढ़ा
SIR को लेकर राज्य में तनावपूर्ण माहौल है।
चुनाव की तैयारी के बीच लाखों मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने की आशंका ने राजनीतिक दलों को सक्रिय कर दिया है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी राजनीतिक गतिविधि देखने की संभावना है।
समाचार लेखक: युवराज कुमार (प्रशिक्षु, मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़)









