अश्रुपूरित श्रद्धांजलि
अ. भा. दि. जैन विद्वत्परिषद् के पूर्व अध्यक्ष जैन वांगमय एवं प्राकृत साहित्य के बहुश्रुत विद्वान आदरणीय प्रो डा.राजाराम जैन जी का 4 जनवरी को नोएडा (उ.प्र.) में आकस्मिक निधन हो गया, वे 97 वर्ष के थे। उन्हें प्राकृत साहित्य का चलता- फिरता विश्वविद्यालय माना जाता था,सिद्धांत चक्रवर्ती आ. श्री विद्यानंद जी की आप पर विशेष कृपा रही। आपका जन्म दिनांक 1 फरवरी 1929 को मध्यप्रदेश के सागर ,जिले के माल्थौन ग्राम में हुआ था । 30 अक्टूबर 1998 में आप अ. भा. दि. जैन विद्वत्परिषद् के अध्यक्ष चुने गये। सन् 2000 में आपके नेतृत्व में विद्वत्परिषद का ऐतिहासिक सम्मेलन श्री क्षेत्र श्रवणवेगोल में पू. भट्टारक श्री चारूकीर्ति जी के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। आपकी कार्यकारिणी में मुझे प्रकाशन व प्रचार मंत्री के पद पर कार्य करने का अवसर मिला।
सन् 2000 में ही आपको राष्ट्रपति सम्मान से अलंकृत किया गया था। आपने प्राकृत शोध संस्थान , वैशाली तथा मगध विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य किया। अपभ्रंश और प्राकृत साहित्य की अनेक दुर्लभ पांडुलिपियों का संपादन करके आपने भारतीय संस्कृति और ज्ञान के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है । आपके द्वारा विपुल साहित्य की रचना की गयी जो आज हमारी धरोहर है। सन् 2019 में आपका अभिनंदन ग्रंथ प्राकृत पुरुष के नाम से प्रकाशित हुआ जो आपकी अमर गाथा का युगों-युगों तक गान करेगा।
आपकी धर्म पत्नी डॉ विद्यावती जैन भी उच्चकोटि की विदुषी थीं। आपको अ. भा. दि. जैन विद्वत्परिषद एवं अ. भा. जैन पत्र संपादक संघ की ओर से अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।









