नई दिल्ली, 14 मार्च: केंद्र सरकार ने कल लोकसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को और अधिक स्पष्ट तथा प्रभावी कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने सदन में यह विधेयक प्रस्तुत करते हुए कहा कि सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रस्तावित संशोधन में ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा को स्पष्ट करने, पहचान से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया को सरल बनाने और भेदभाव के मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान करने की बात कही गई है। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक ट्रांसजेंडर समुदाय की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
गौरतलब है कि भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए पहले ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 लागू किया गया था। इसके तहत किसी भी प्रकार के भेदभाव—जैसे शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक स्थानों पर—को प्रतिबंधित किया गया है।
सरकार के अनुसार देश में लाखों ट्रांसजेंडर व्यक्ति रहते हैं और उनके सामाजिक समावेशन के लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था आवश्यक है। नया संशोधन विधेयक इन्हीं प्रावधानों को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
अब इस विधेयक पर संसद में विस्तृत चर्चा होने की संभावना है, जिसके बाद इसे पारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
-यश जयसवाल (प्रशिक्षु, मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़)









