गणतंत्र दिवसः संविधान, लोकतंत्र और नागरिक दायित्व

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डा. अखिल बंसल

गणतंत्र दिवस 2026 भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान की शक्ति और नागरिक चेतना का प्रतीक है। 26 जनवरी 1950 को भारत ने अपने संविधान को

akhil bansal
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अंगीकार कर एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में विश्व पटल पर स्वयं को स्थापित किया। यह दिवस केवल राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि भारत की संवैधानिक आत्मा का उत्सव है।

भारतीय संविधान विश्व का सबसे व्यापक और समावेशी संविधान माना जाता है। इसमें स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुत्व जैसे मूल्य न केवल आदर्श रूप में अंकित हैं, बल्कि शासन और समाज की दिशा भी तय करते हैं। गणतंत्र का वास्तविक अर्थ यही है कि देश का शासन कानून से चले, न कि किसी व्यक्ति या वर्ग की इच्छा से।

आज जब भारत विकास, तकनीक और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब लोकतंत्र की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। चुनाव में भाग लेना ही लोकतंत्र नहीं है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान, सामाजिक समरसता, और संविधान के प्रति निष्ठा भी उतनी ही आवश्यक है। एक जागरूक नागरिक ही सशक्त गणतंत्र की नींव होता है।
गणतंत्र दिवस पर आयोजित राष्ट्रीय परेड और सांस्कृतिक झांकियाँ भारत की विविधता में एकता का सजीव चित्र प्रस्तुत करती हैं। यह आयोजन देश की सैन्य क्षमता के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत और संगठनात्मक अनुशासन को भी दर्शाता है। किंतु इन आयोजनों से अधिक महत्वपूर्ण है-संविधान के मूल्यों को दैनिक जीवन में अपनाना।

गणतंत्र दिवस का संदेश स्पष्ट है- अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं। जब तक नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग नहीं होंगे, तब तक लोकतंत्र केवल एक औपचारिक व्यवस्था बनकर रह जाएगा। सच्ची राष्ट्रभक्ति वही है, जो संविधान का सम्मान करे और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाए।

इस गणतंत्र दिवस पर संकल्प लें कि हम केवल स्वतंत्र नागरिक ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार भारतीय बनेंगे। यही संविधान निर्माताओं के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि और गणतंत्र की वास्तविक सार्थकता है।
*-डा. अखिल बंसल*

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