Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा और काशी की मलइयो अब वैश्विक पहचान की ओर

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

लखनऊ.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश में शुरू की गई एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी)  योजना ने स्थानीय उद्योगों, कारीगरों और निर्यात को नई दिशा दी है। ओडीओपी के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश के लाखों कारीगरों को स्वरोजगार मिला, निर्यात बढ़ा और यूपी की पहचान वैश्विक बाजारों तक पहुंची।

अब इसी सफलता मॉडल को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की समृद्ध पाक-कला विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से “एक जनपद–एक व्यंजन” यानी ओडीओसी (वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुजीन) योजना की शुरुआत की है। यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरासत संग विकास विजन का विस्तार है, जिसमें सांस्कृतिक पहचान, पर्यटन, रोजगार और निर्यात को एक साथ साधने का प्रयास किया गया है।

क्या है ओडीओसी योजना का उद्देश्य

ओडीओसी योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद से एक विशिष्ट, ऐतिहासिक और पारंपरिक व्यंजन की पहचान की जाएगी। इस योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं-

 प्रदेश की पारंपरिक पाक-कला विरासत का संरक्षण व संवर्धन
 व्यंजन तैयार करने वाले स्थानीय कारीगरों, हलवाइयों का पंजीकरण
 चयनित व्यंजनों का गुणवत्ता मानकीकरण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग
 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यंजनों को पहचान दिलाना
 स्थानीय आजीविका, स्वरोजगार व एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा

ओडीओपी की तर्ज पर ओडीओसी भी जमीनी स्तर पर रोजगार सृजन का एक प्रभावी माध्यम बनेगी, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। पैकेजिंग  जीआई टैग और ई-कॉमर्स से स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक मंच मिलेगा।

इस योजना के अंतर्गत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग के सहयोग से फूड पैकेजिंग, शेल्फ लाइफ बढ़ाने और सुरक्षित परिवहन पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्थानीय उद्यमियों को एफएसएसएआई सर्टिफिकेशन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पारंपरिक फूड वेंडर्स को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा जाएगा। चयनित व्यंजनों की जीआई टैगिंग कर उनकी प्रामाणिकता और अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही पर्यटन विभाग के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों और महोत्सवों में ओडीओसी फूड स्टाल लगाए जाएंगे, जिससे पर्यटक एक ही स्थान पर उत्तर प्रदेश के विविध स्वादों का अनुभव कर सकें।

दुनिया तक पहुँचेगा यूपी का स्वाद

उत्तर प्रदेश का लगभग हर जनपद किसी न किसी विशिष्ट व्यंजन के लिए प्रसिद्ध है। जैसे आगरा का पंछी पेठा, मथुरा का ब्रजवासी पेड़ा, अयोध्या का रामआसरे पेड़ा, अलीगढ़ (इगलास) का चमचम, बाराबंकी की चंद्रकला, पूर्वांचल का बाटी-चोखा व लिट्टी-चोखा, लखनऊ की रेवड़ी व मलाई मक्खन, काशी की लौंगलता व मलइयो, संडीला (हरदोई) के लड्डू और कानपुर के समोसे। ऐसे सैकड़ों व्यंजन हैं, जो अपने शहर में तो लोकप्रिय हैं, लेकिन राज्य या देश से बाहर इन्हें सीमित पहचान मिली है। ओडीओसी योजना के माध्यम से यूपी के सभी 75 जनपदों के इन ऐतिहासिक व स्वादिष्ट व्यंजनों को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश में शुरू की गई एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी)  योजना ने स्थानीय उद्योगों, कारीगरों और निर्यात को नई दिशा दी है। ओडीओपी के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश के लाखों कारीगरों को स्वरोजगार मिला, निर्यात बढ़ा और यूपी की पहचान वैश्विक बाजारों तक पहुंची। अब इसी सफलता मॉडल को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की समृद्ध पाक-कला विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से “एक जनपद–एक व्यंजन” यानी ओडीओसी (वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुजीन) योजना की शुरुआत की है। यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरासत संग विकास विजन का विस्तार है, जिसमें सांस्कृतिक पहचान, पर्यटन, रोजगार और निर्यात को एक साथ साधने का प्रयास किया गया है।

क्या है ओडीओसी योजना का उद्देश्य

ओडीओसी योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद से एक विशिष्ट, ऐतिहासिक और पारंपरिक व्यंजन की पहचान की जाएगी। इस योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं-

 प्रदेश की पारंपरिक पाक-कला विरासत का संरक्षण व संवर्धन
 व्यंजन तैयार करने वाले स्थानीय कारीगरों, हलवाइयों का पंजीकरण
 चयनित व्यंजनों का गुणवत्ता मानकीकरण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग
 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यंजनों को पहचान दिलाना
 स्थानीय आजीविका, स्वरोजगार व एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा

ओडीओपी की तर्ज पर ओडीओसी भी जमीनी स्तर पर रोजगार सृजन का एक प्रभावी माध्यम बनेगी, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। पैकेजिंग  जीआई टैग और ई-कॉमर्स से स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक मंच मिलेगा। इस योजना के अंतर्गत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग के सहयोग से फूड पैकेजिंग, शेल्फ लाइफ बढ़ाने और सुरक्षित परिवहन पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्थानीय उद्यमियों को एफएसएसएआई सर्टिफिकेशन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पारंपरिक फूड वेंडर्स को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा जाएगा। चयनित व्यंजनों की जीआई टैगिंग कर उनकी प्रामाणिकता और अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही पर्यटन विभाग के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों और महोत्सवों में ओडीओसी फूड स्टाल लगाए जाएंगे, जिससे पर्यटक एक ही स्थान पर उत्तर प्रदेश के विविध स्वादों का अनुभव कर सकें।

दुनिया तक पहुँचेगा यूपी का स्वाद
उत्तर प्रदेश का लगभग हर जनपद किसी न किसी विशिष्ट व्यंजन के लिए प्रसिद्ध है। जैसे आगरा का पंछी पेठा, मथुरा का ब्रजवासी पेड़ा, अयोध्या का रामआसरे पेड़ा, अलीगढ़ (इगलास) का चमचम, बाराबंकी की चंद्रकला, पूर्वांचल का बाटी-चोखा व लिट्टी-चोखा, लखनऊ की रेवड़ी व मलाई मक्खन, काशी की लौंगलता व मलइयो, संडीला (हरदोई) के लड्डू और कानपुर के समोसे। ऐसे सैकड़ों व्यंजन हैं, जो अपने शहर में तो लोकप्रिय हैं, लेकिन राज्य या देश से बाहर इन्हें सीमित पहचान मिली है। ओडीओसी योजना के माध्यम से यूपी के सभी 75 जनपदों के इन ऐतिहासिक व स्वादिष्ट व्यंजनों को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

Editor
Author: Editor

Leave a Comment

और पढ़ें