नई दिल्ली। विशेष सत्र के दूसरे दिन संसद में महिलाओं के आरक्षण बिल और प्रस्तावित परिसीमन को लेकर सियासी हलचल और तेज हो गई। विपक्षी दलों ने सरकार पर विधेयक को “जटिल प्रक्रियाओं की बेड़ियों” में बांधने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र मुद्दे को सरल बनाने के बजाय भ्रम फैला रहा है। वहीं सरकार का पक्ष है कि प्रस्तावित संशोधन “प्रक्रियात्मक जिम्मेदारी” के तहत आगे बढ़ाए जा रहे हैं।
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने अपनी ही पार्टी की शीर्ष नेतृत्व की अनुपस्थिति पर चुटकी लेते हुए कहा कि वह “हटाए गए उपनेता” हैं, लेकिन चर्चा में मौजूद हैं। उन्होंने संकेत दिया कि इतने अहम सत्र में पार्टी नेतृत्व की गैरहाज़िरी कई सवाल खड़े करती है।
लोकसभा में कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने महिलाओं के लिए आरक्षण और परिसीमन के बीच बनाए गए संबंध पर भाजपा को कठघरे में खड़ा किया। उनका कहना था कि विपक्षी दल अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं, लेकिन सरकार का रुख अस्पष्ट है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कानून की अधिसूचना तक जारी नहीं हुई और अब सरकार नए संशोधनों पर तेजी से आगे बढ़ रही है।
कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने केंद्र पर “误leading statements” देने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सदन में तथ्य छिपा रहे हैं और बिल को परिसीमन से जोड़कर इसे जटिल बना दिया गया है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने मतदान से पहले सर्वदलीय बैठक की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इसे ठुकरा दिया। उनके अनुसार, बिल के विरोध पर “सजा” जैसे बयान लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर दबाव डालते हैं।
कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने दिल्ली में कहा कि सरकार की तरफ से लाया गया महिला आरक्षण संशोधन “ईमानदार प्रयास” नहीं लगता। उन्होंने आरोप लगाया कि बिल का उद्देश्य महिलाओं को न्याय देना नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति साधना है। चेन्निथला ने कहा कि यदि केंद्र गंभीर है तो मौजूदा सीटों पर ही आरक्षण लागू किया जा सकता है, परिसीमन की जरूरत क्यों?
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जगदीश शेट्टर ने परिसीमन प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि लोकसभा और विधानसभा की सीटों में 50% तक बढ़ोतरी तार्किक है। उन्होंने माना कि कुछ राज्यों में विरोध हो सकता है, लेकिन उनका मानना है कि नया ढांचा भविष्य की जनसांख्यिकी के अनुरूप है।
लोकसभा में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि महिलाओं को 33% प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए देश में शायद पहली बार सर्वसम्मति जैसी स्थिति बन रही है, लेकिन सरकार ने इस ऐतिहासिक कदम को “2011 की जनगणना, नए परिसीमन और सीटों में इजाफे” से जोड़कर इसे व्यावहारिक रूप से दूर धकेल दिया है। उन्होंने इसे महिलाओं की आकांक्षाओं को “प्रक्रियात्मक भूलभुलैया” में फंसाने के बराबर बताया।
डीएमके सांसद कनिमोझी ने परिसीमन बिल को संघीय ढांचे पर “सबसे बड़ा हमला” करार दिया। उन्होंने काला परिधान पहनकर विरोध जताया और सवाल उठाया कि जब संसद में बिल पर चर्चा जारी थी, तभी महिलाओं के आरक्षण कानून की अधिसूचना क्यों जारी की गई। उन्होंने कहा कि जनसंख्या आधारित परिसीमन दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय है, जिन्होंने परिवार नियोजन और विकास सूचकांकों पर वर्षों गंभीरता से काम किया है। उन्होंने चेताया कि 2011 की जनगणना पर आधारित परिसीमन से दक्षिणी राज्यों की आवाज़ संसद में कमजोर होगी।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजनिजू ने मीडिया से कहा कि सरकार सिर्फ प्रक्रियागत सुधार कर रही है और पुराने कानून के लागू न होने के कारण नई अधिसूचना जारी करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि विधायी प्रक्रिया को मुद्दा बनाना उचित नहीं।
राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश नारायण सिंह को लगातार तीसरी बार उपसभापति चुने जाने पर बधाई दी और कहा कि सदन ने जिस भरोसे के साथ उन्हें फिर यह जिम्मेदारी सौंपी है, वह उनके अनुभव और संतुलित नेतृत्व का सम्मान है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश की भूमिका से सदन की मर्यादा और प्रभावशीलता दोनों में मजबूती आई है।
विशेष सत्र में महिलाओं के आरक्षण, परिसीमन और संसद की सीट बढ़ोतरी से जुड़े तीन अहम विधेयक केंद्र में हैं, जिन पर आज भी जोरदार बहस जारी रहने की उम्मीद है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार चुनावों से ठीक पहले जल्दबाजी में बड़े बदलाव थोप रही है, वहीं सरकार दावा कर रही है कि यह सुधार देश के भविष्य को ध्यान में रखकर की जा रही पहल का हिस्सा हैं।
समाचार संकलन: युवराज कुमार (प्रशिक्षु, मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़)








