मध्य पूर्व तनाव के बीच तेल 84 डॉलर के पार, भारत पर महंगाई का दबाव संभव

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4 मार्च 2026:

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को तेज़ी बनी रही। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 84.07 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया, जबकि अमेरिकी मानक पश्चिम टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) करीब 76.80 डॉलर प्रति बैरल पर बना रहा। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह तेजी हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर आशंकाएँ बढ़ा दी हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख समुद्री मार्ग पर जोखिम बढ़ने से निवेशकों में चिंता का माहौल है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है, जिससे किसी भी व्यवधान का सीधा असर वैश्विक कीमतों पर पड़ता है।

भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति महंगाई का दबाव बढ़ा सकती है। हालांकि 4 मार्च को देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीज़ल की खुदरा कीमतें स्थिर रहीं—दिल्ली में पेट्रोल ₹94.72 और मुंबई में ₹104.21 प्रति लीटर दर्ज किया गया—लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी तेजी भविष्य में घरेलू ईंधन दरों को प्रभावित कर सकती है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

लेखक- यश जयसवाल (प्रशिक्षु, मंगलायतन विश्वविद्यालय)

YASH JAYSWAL
Author: YASH JAYSWAL

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