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ईरान में सत्ता परिवर्तन: भारत को झटका, पाकिस्तान-चीन की बढ़ी रणनीतिक बढ़त

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तेहरान
ईरान में अयातुल्लाह अली खामेनेई का शासन पहली बार अंदर और बाहर से इतने दबाव में है। एक तरफ देश में प्रदर्शन चल रहे हैं तो वहीं अमेरिका की ओर से लगातार सैन्य हस्तक्षेप की धमकियां दी जा रही हैं। बीते करीब 4 दशकों से देश से बाहर रह रहे विपक्षी नेता रजा पहलवी भी ऐक्टिव हो गए हैं और उनका कहना है कि वह जल्दी ही ईरान लौट सकते हैं। ऐसे हालात में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें काफी ज्यादा हैं। इस बीच जानकारों का कहना है कि यदि ईरान में सरकार बदलती है तो इससे भारत को ही झटका लगेगा। वहीं चीन और पाकिस्तान जैसे मुल्कों को इसका कुछ फायदा हो सकता है।  
 
पहली वजह यह है कि जब पाकिस्तान जमीनी रास्ते के जरिए पश्चिम एशिया पहुंचने की भारत की कोशिशों के आड़े आता है तो उसमें ईरान एक मददगार के रूप में दिखता है। सालों से ईरान और भारत इस मामले में रणनीतिक साझेदार रहे हैं। चाबहार बंदरगाह इसकी एक बानगी है, जिसे चीन और पाकिस्तान के बनाए ग्वादर पोर्ट के मुकाबले में देखा जाता है। इसके अलावा सुन्नी मुसलमान देश पाकिस्तान जब उम्मा के नाम पर इस्लामिक एकता की बात करता है तो उसमें ईरान एक काउंटर-बैलेंस बनाता है। भारत के लिए यह फायदे की स्थिति रही है, लेकिन जब ईरान में अमेरिकी पिट्ठू सरकार होगी तो भारत के लिए स्थिति बदल जाएगी।

 

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Author: Editor

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