Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

मकर संक्रांति 2026: कब है पुण्यकाल? स्नान-दान और पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त यहां जानें

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

सनातन परंपरा में मकर संक्रांति को आध्यात्मिक शुद्धि और नई ऊर्जा का पर्व माना जाता है, जब स्नान, दान, ध्यान और सूर्य आराधना का विशेष महत्व बताया गया है. वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 14 जनवरी, बुधवार को मनाया जाएगा. इसी दिन सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होते हैं, जिससे शुभ कार्यों और सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत मानी जाती है. शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति पर किए गए पुण्य कर्म पूरे वर्ष सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करते हैं. यही कारण है कि इस दिन के स्नान, पूजा और ध्यान के शुभ मुहूर्त को जानने की जिज्ञासा श्रद्धालुओं में विशेष रूप से बनी रहती है.

मकर संक्रांति पर पुण्यकाल कब लगता है?

शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन पुण्यकाल का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि जिस क्षण सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होते हैं, उसी समय से पुण्यकाल आरंभ हो जाता है. अधिकांश पंचांगों के अनुसार, मकर संक्रांति का पुण्यकाल सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक रहता है. सामान्य रूप से यह अवधि लगभग 10 से 11 घंटे की मानी जाती है, हालांकि स्थान विशेष के अनुसार इसमें हल्का अंतर संभव है. इस पुण्यकाल के दौरान किया गया स्नान, दान, जप और पूजा विशेष फल प्रदान करते हैं. मान्यता है कि इस समय किए गए धार्मिक कर्म न केवल वर्तमान जीवन को शुभ बनाते हैं, बल्कि जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय कर आत्मशुद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं.

मकर संक्रांति का पुण्यकाल (लगभग)

    पुण्यकाल का आरंभ- प्रातः 07:15 बजे रहेगा.
    पुण्यकाल की समाप्ति- सायं 05:45 बजे रहेगा.

स्नान और ध्यान का शुभ समय क्या है?

मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सूर्योदय तक स्नान करना सर्वोत्तम और अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, इस पावन समय में किया गया स्नान तन के साथ-साथ मन और आत्मा की भी शुद्धि करता है. मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है.

यदि किसी कारणवश गंगा या अन्य तीर्थों में स्नान संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी समान पुण्य प्रदान करता है. स्नान के पश्चात शांत और एकाग्र मन से सूर्यदेव का ध्यान करना, गायत्री मंत्र या सूर्य मंत्रों का जप करना विशेष फलदायी माना गया है. ध्यान और जप से मानसिक तनाव कम होता है, आत्मबल बढ़ता है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है.

पूजा, अर्घ्य और दान से मिलता है पूर्ण पुण्य

मकर संक्रांति के दिन स्नान के बाद सूर्यदेव की पूजा और अर्घ्य अर्पित करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, तांबे के पात्र में स्वच्छ जल, लाल फूल, अक्षत और गुड़ डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य देना विशेष पुण्य प्रदान करता है. अर्घ्य अर्पित करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख कर सूर्य मंत्रों का जप करना शुभ माना गया है. इसके साथ ही इस दिन तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र और भोजन का दान करना भी अत्यंत कल्याणकारी बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति पर श्रद्धा, नियम और विधि से किया गया स्नान, ध्यान और सूर्य उपासना व्यक्ति के जीवन में उत्तम स्वास्थ्य, आर्थिक समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है, जिससे पूरे वर्ष सुख और संतुलन बना रहता है.

Editor
Author: Editor

Leave a Comment

और पढ़ें