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मैं पारंपरीक त्योहार पर पतंगबाजी का विरोधी नहीं हूं परंतु पतंगबाजी खुले एरिया में ही हो

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शहरो मे बढ़ती जनसंख्या देखते हुए पतंगबाजी के पारंपरिक तरीकों में बदलाव जरूरी है, इन दिनों लगातार चाइनीस मांजे को लेकर विगत कई वर्षो से कई मृत्यु हो रही कई घायल हो रहे, कितने ही बेजुबा पक्षी घायल हुए होंगे तड़प तड़प कर मरे होंगे, लेकिन यह सिलसिला रुक ही नहीं रहा, इसका प्रमुख कारण घनीआबादी क्षेत्र में पतंगबाजी।
हम पारंपरिक तौर से त्यौहार पर पतंगबाजी 🪁करते हैं पर अब समय आ गया इस पर बदलाव होना चाहिए, मकान की छतो के बजाय कहीं बहुत बड़े खुले एरिया में ही पतंगबाजी की अनुमति देना चाहिए और ध्यान रखें पक्षियों के घर लौटते समय पतंगबाजी ना हो ताकि हमारी परंपरा भी कायम रहे और हादसे भी ना हो, साथ ही इसमे प्रयुक्त धागे को मांजा नहीं बनने देना चाहिए उसे सिर्फ सादी डोर ही रखना चाहिए। धागे पर सरस पिसे हुए कांच या चीनी मांजा प्रयुक्त करना कानूनन अपराध है उस पर कार्यवाही होना चाहिए, कठोर कानून है पर उसका किसी को डर नहीं है, प्राप्त जानकारी अनुसार निम्न धाराए लग सकती है।
(भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएँ)
धारा 336 – किसी के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कृत्य
धारा 337 – लापरवाही से किसी को चोट पहुँचाना
धारा 338 – लापरवाही से गंभीर चोट पहुँचाना
धारा 304A – लापरवाही से मृत्यु कारित करना (यदि किसी की मृत्यु हो जाए)
धारा 268 – सार्वजनिक उपद्रव (Public Nuisance)
धारा 289 – खतरनाक साधनों के उपयोग में लापरवाही (अन्य लागू धारा)
🐦 पशु एवं पक्षी संरक्षण से जुड़ी धाराएँ
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
धारा 9 – वन्य जीवों/पक्षियों को मारना या घायल करना निषिद्ध
धारा 51 – दंड का प्रावधान (जुर्माना/कारावास)
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960
धारा 11 – जानवरों/पक्षियों को अनावश्यक पीड़ा पहुँचाना
🤞जनता ने भी जागरूकता रखना चाहिए और जहां पर भी ऐसा मांजा बिकता है उसकी सूचना तुरंत पुलिस को देना चाहिए।
🤞 *पर्यावरणविद् होने के नाते हम शासन प्रशासन से मांग करते हैं घनी आबादी और शहरी क्षेत्र में पतंगबाजी पर पूरी रोक लगना चाहिए।*
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक पत्रकार पर्यावरणविद्)

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