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Aadhaar-मोबाइल लिंक वालों के लिए अलर्ट! साइबर ठगों की नई चाल, लाखों की ठगी का खतरा

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नई दिल्ली

अगर आपने भी आधार और मोबाइल नंबर को लिंक कराया है, तो आपको भी चौकन्ना हो जाना चाहिए। दरअसल साइबर अपराधियों ने लोगों के बैंक खाते खाली करने का नया तरीका निकाल लिया है। गुजरात के नडियाद में एक होटल मैनेजर के साथ ऐसा कुछ हुआ है, जिसने प्रशासन समेत आम आदमी की नींद भी उड़ा दी है। इस काम को अंजाम देने के लिए अपराधियों ने उस शख्स के मोबाइल नंबर और आधार कार्ड तक को कैंसिल कर दिया ताकि उसे कोई बैंक अलर्ट या OTP न मिल सके।

क्या है ठगी का नया तरीका?
इस मामले में पीड़ित नवलकिशोर सिंह बोहरा ने हाल ही में अपना आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदला था। उनके नए नंबर से आधार कनेक्ट होता, उससे पहले ही उनके पुराने सिम के नेटवर्क गायब हो गए। जब वह टेलीकॉम सेंटर गए, तो मालूम पड़ा कि उनका आधार कार्ड कैंसिल हो गया है। इसी वजह से उनका सिम भी डिक्टिवेट हो गया था। पुलिस की मानें, तो साइबर अपराधियों ने अपने जुर्म को सफाई से अंजाम देने के मकसद से ही पीड़ित के आधार कार्ड को बंद किया था, ताकि बैंक खाता खाली होते समय उन्हें कोई मैसेज न मिल पाए। इस दौरान अपराधियों को पीड़ित के HDFC और SBI बैंक खातों में सेंध लगाने का मौका मिल गया।

बिना OTP कैसे हो पाई ठगी?
इस मामले में हैरान करने वाली बात यह है कि ठगों को पीड़ित का बैंक खाता खाली करने के लिए किसी OTP की जरूरत नहीं पड़ी। इससे भी बड़ी बात यह थी कि बिना ओटीपी बैंक से लाखों रुपये ट्रांसफर कर लिए गए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार,(REF.) पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगों ने वारदात को अंजाम देने से पहले पीड़ित की आधार डिटेल्स और बैंक खातों की जानकारी जुटाई थी। इसके बाद उनके आधार ऑथेंटिकेशन और सिम कार्ड को ब्लॉक करा दिया गया। सिम के चालू न होने के चलते पीड़ित को बैंक खातों के खाली होने का पता नहीं चल पाया और ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों में 3.09 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

आप किन बातों का ध्यान रखें?
पुलिस के मुताबिक यह साइबर अपराधियों का ठगी का नया तरीका है। नडियाद पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड्स और टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर उन खातों की तलाश शुरू कर दी है जिनमें पैसा भेजा गया है। पुलिस के अनुसार अगर आपके सिम कार्ड के नेटवर्क भी अचानक गायब हो जाएं और आपको कुछ भी संदिग्ध लगे, तो तुरंत बैंक को सूचित करें और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।

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Author: Editor

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