Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

मकर संक्रांति पर कुबेरेश्वरधाम में भक्तों का उमड़ा सैलाब, शिव भोग के लिए बने 5100 तिल-गुड़ के लड्डू

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

सीहोर
सीहोर स्थित कुबेरेश्वरधाम पर मकर संक्रांति का पर्व हर वर्ष की तरह इस बार भी गहन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में विशेष धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जो प्रकृति, कृषि और आध्यात्मिक चेतना को एक सूत्र में बांधता है। कुबेरेश्वरधाम में इस दिन भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है, जो सूर्य के उत्तरायण होने की इस शुभ बेला में भगवान शिव की आराधना कर पुण्य लाभ अर्जित करती है।

5100 तिल-गुड़ लड्डुओं का विशेष भोग

मकर संक्रांति के अवसर पर इस वर्ष कुबेरेश्वरधाम में लगभग 5100 तिल-गुड़ के लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। तिल और गुड़ का विशेष महत्व इस पर्व से जुड़ा हुआ है, जो स्वास्थ्य, मधुरता और आपसी सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। आधुनिक भोजनशाला में इन लड्डुओं के निर्माण की तैयारियां पूरे विधि-विधान और शुद्धता के साथ की जा रही हैं। भोग अर्पित होने के पश्चात इन्हें श्रद्धालुओं में प्रसादी के रूप में वितरित किया जाएगा, जिससे हर भक्त इस पावन पुण्य का सहभागी बन सके।

हजारों श्रद्धालुओं के लिए भव्य प्रसादी व्यवस्था
धाम पर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए व्यापक स्तर पर भोजन-प्रसादी की व्यवस्था की गई है। तिल-गुड़ के लड्डुओं के साथ-साथ खिचड़ी, नुक्ती, मिठाई और नमकीन भी वितरित की जाएगी। मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने, खाने और दान करने की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। यही कारण है कि इस पर्व पर खिचड़ी का विशेष धार्मिक और सामाजिक महत्व है। कुबेरेश्वरधाम में यह परंपरा पूरी श्रद्धा और सेवा भाव से निभाई जाती है।

सेवा कार्यों में जुटे मंदिर पदाधिकारी
मंगलवार को मंदिर व्यवस्थापक पंडित समीर शुक्ला, पंडित विनय मिश्रा सहित अन्य सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया। व्यवस्थाओं की निगरानी स्वयं समिति के वरिष्ठ सदस्य कर रहे हैं, ताकि किसी भी भक्त को असुविधा न हो। सेवा को ही साधना मानकर कार्य कर रहे स्वयंसेवकों का उत्साह देखते ही बनता है। पूरा वातावरण “सेवा ही शिव है” की भावना से ओतप्रोत दिखाई देता है।

मकर संक्रांति का सांस्कृतिक महत्व
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि मकर संक्रांति देशभर में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाई जाती है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और नई फसल की कटाई का प्रतीक है। यही कारण है कि यह त्योहार केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भी संदेश देता है। कुबेरेश्वरधाम पर इस दिन आस्था के साथ-साथ लोक परंपराओं का भी सुंदर संगम देखने को मिलता है।

रुद्राक्ष महोत्सव की तैयारियों की रूपरेखा
मकर संक्रांति के आयोजन के साथ ही विठलेश सेवा समिति द्वारा आगामी रुद्राक्ष महोत्सव की तैयारियों को लेकर भी चर्चा की गई। समिति के सदस्यों ने आयोजन की रूपरेखा तैयार करते हुए व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विचार किया। कुबेरेश्वरधाम निरंतर धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक आयोजनों का केंद्र बनता जा रहा है। यहां मनाए जाने वाले पर्व न केवल श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति जगाते हैं, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और सद्भाव का संदेश भी देते हैं।

 

Editor
Author: Editor

Leave a Comment

और पढ़ें