जयपुर
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के आयुक्त राकेश शर्मा ने कहा है कि सरकार और पत्रकारों का उद्देश्य समान है जनकल्याण और सामाजिक सरोकार। वे एसोसिएशन ऑफ स्मॉल एंड मीडिया न्यूज पेपर्स ऑफ इंडिया की ओर से 31 जनवरी को जेएलएन रोड स्थित कलानेरी में अपराध एवं सामाजिक सरोकार पत्रकारिता विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पत्रकार स्वतंत्र होते हैं, जबकि सरकार नियम-कायदों में बंधी होती है। लेकिन जब दोनों एक ही लक्ष्य को लेकर साथ चलते हैं तो उसके सकारात्मक परिणाम समाज को मिलते हैं। सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने समाचारों में सामाजिक सरोकार से जुड़े पहलुओं को उजागर करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि अपराधों की रोकथाम के लिए आमजन के कड़े विरोध के प्रति जनता को जागरूक करने में समाचार पत्रों की अहम भूमिका है।
छोटे अखवारों का भी बडा असर
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार गुलाब बत्रा ने कहा कि छोटे अखबारों में प्रकाशित खबरें भी बड़ा असर छोड़ती हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक सरोकार और अपराध एक-दूसरे से जुड़े हैं और इस विषय पर लिखना वर्तमान समय में दुष्कर कार्य है। इसलिए पत्रकारिता को सावधानीपूर्वक करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम के संयोजक एस.जी. शर्मा ने बताया कि कई कानूनी पहलुओं पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है।
अधिस्वीकृत पत्रकारों को भी सम्मान निधि राशि देने की मांग की
पत्रकारों को ईगो से दूर रहने की सलाह
राजस्थान पत्रिका के डिप्टी एडिटर हरीश पाराशर ने पत्रकारों को ईगो से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि खबर लिखते समय किसी का अहित न हो और पीड़ित को न्याय मिले, यह पत्रकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। वरिष्ठ पत्रकार ऐश्वर्य प्रधान ने कहा कि छोटे अखबारों की अच्छी खबरें बड़ी बहस का कारण बन जाती हैं। इस दौरान वक्ताओं ने ऐसे जो 60 वर्ष के हो गए हैं लेकिन उनके अधिस्वीकरण को 10 वर्ष पूरे नहीं हुए हैं। ऐसे पत्रकारों के लिए 10 साल का पीएफ कटना अनिवार्य किया जा सकता है। एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने पत्रकारों की मांगें रखते हुए कहा कि सम्मान निधि राशि बढ़ाई जाए, रोडवेज यात्रा सुविधा दूसरे राज्यों तक निशुल्क की जाए, आरजेएचएस में आउटडोर स्कीम जोडी जाए और आरटीडीसी होटलों में अधिक छूट दी जाए। कार्यक्रम का संचालन महासचिव अमृता मौर्य ने किया।









