किसी ने कहा कोहरा है
किसी ने कहा शीत लहर है
वही बाप ने कहा
निकल जा
जिधर
निकलना है
ये तो मौसम है
कभी गरमी,कभी सर्दी तो कभी
बरसात
लगा ही रहेगा
तो
क्या
काम करना छोड़ देगा।
भला इससे पेट को
क्या लेना देना
उसे तो
भरना ही पड़ेगा।
चाहे गर्मी हो या जाड़ा
या फिर बरसात
इसलिए तू उठ
और
काम पे जा
देखता नही
कैसे मौसम को
मात देके
रोज कमाने खाने वाले
टपरी लगाने वाले
भोरहे
बिछौना त्याग देते हैं
फिर
दिन ढले ही आते है
गर ना
त्यागे तो चूल्हा उदास रहे
बरतन परेशान
औरत भी घर की तेवरी
चढ़ा के देखेगी बार बार
इसलिए उठ
आलस त्याग
बिछौना का मोह छोड़
और काम पर निकल
धरा पैसा बहुत दिन काम ना आयेगा
एक दिन
चुक ही जायेगा।
इसलिए
कर्मठ बन
क्योंकि
धनि
वही जो
कर्मठ है
निठल्ले के पास लाख
धन हो
पर
निर्धन ही कहलायेगा।
कंचन श्रीवास्तव आरज़ू
प्रयागराज









