दिल्ली की नूपुर जैन ने समाज और परिवार के विरोध के बावजूद 21 वर्ष की आयु में इण्डियन एयर फोर्स ज्वाइन कर इतिहास रच दिया। जैन समुदाय से होने के कारण उन्हें “शादी नहीं होगी” और “जैन लोग फौज में नहीं जाते” जैसे कई ताने सुनने पड़े । रिश्तेदारों को डर था कि फौज में जाने से उन्हें नॉनवेज खाना पड़ेगा और रात की ड्यूटी करनी होगी, लेकिन नूपुर ने इन सभी रूढ़ियों को तोड़कर अपने सपनों को चुना।
नूपुर ने स्कूल के दिनों में ही एनसीसी (NCC) जॉइन कर ली थी और मात्र 13 साल की उम्र में हरियाणा के एक फायरिंग कैंप में पहली बार असली बंदूक चलाई थी । एनसीसी में मिले अनुशासन और लैंगिक समानता के माहौल ने उन्हें सेना में जाने के लिए प्रेरित किया।
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उनका चयन एयर फोर्स और नेवी दोनों में हुआ, लेकिन उन्होंने वायु सेना को चुना । “शादी न होने” की तमाम आशंकाओं को गलत साबित करते हुए, उन्होंने एयर फोर्स के ही विंग कमांडर कुलदीप जैन से शादी की और आज वे एक सफल स्क्वाड्रन लीडर के रूप में देश की सेवा कर रही हैं।









