Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

भोपाल की सांसे नहीं रुकेगी; अयोध्या बायपास के लिए 8 हजार पेड़ काटने पर NGT की रोक बरकरार

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

भोपाल 
 विकास बनाम पर्यावरण की जंग में हरियाली की जीत होती दिख रही है. भोपाल के अयोध्या बायपास रोड को 10 लेन बनाने के लिए प्रस्तावित पेड़ों की कटाई पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है. एनजीटी ने इस प्रोजेक्ट पर लगी रोक को बरकरार रखा है. इसके साथ ही एनजीटी ने इस मुद्दे को केवल भोपाल तक सीमित न रखते हुए पूरे देश में लागू होने वाली एक समान नीति बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है, जिससे विकास कार्यों की आड़ में पेड़ों का अंधाधुंध सफाया न हो.

विकास के साथ पर्यावरण संतुलन जरूरी

यह फैसला नितिन सक्सेना बनाम राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) प्रकरण में सुनाया गया. न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर पूरे देश में एक समान और सख्त नीति होना आवश्यक है. इससे आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जा सकेगा. इसी के साथ इस प्रकरण को एनजीटी की प्रधान पीठ, नई दिल्ली स्थानांतरित करने के निर्देश भी दिए गए हैं.

अयोध्या बायपास रोड के लिए कटने हैं हजारों पेड़

सड़कों के विस्तार और शहरों की बढ़ती जरूरतों के बीच पर्यावरण संरक्षण का सवाल अब राष्ट्रीय स्तर पर भी उठने लगा है. भोपाल के अयोध्या बायपास पर प्रस्तावित 10 लेन सड़क परियोजना के कारण हजारों पेड़ों की कटाई का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तक पहुंचा, जहां कटाई पर स्टे बरकरार रखा गया है. एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके नाम पर प्रकृति की बलि स्वीकार्य नहीं है.

यह पेड़ नहीं भोपाल की सांसें हैं

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने दलील दी कि ये पेड़ केवल लकड़ी नहीं, बल्कि भोपाल के नागरिकों की सांसों की सुरक्षा हैं. दूसरी ओर एनएचएआई ने परियोजना की आवश्यकता और समयबद्धता का हवाला दिया. इस बीच यह भी सामने आया कि पहले दिए गए स्थगन आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील को वापस ले लिया गया है. हालांकि, इस दौरान कोई आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, जिसके बाद एनजीटी ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग अपील का स्टेटस साफ नहीं होता, तब तक ट्रिब्यूनल इस मामले में आगे कोई सुनवाई नहीं करेगा और पहले से कटाई पर लगाई गई रोक बरकरार रहेगी.

पूरे देश में मिसाल बनेगा ये फैसला

बता दें की एनजीटी ने भोपाल में काटे जाने वाले 8 से 12 हजार पेड़ों को शहर के फेफड़े बताया. आसाराम तिराहा से करोंद होते हुए रत्नागिरी तिराहा तक प्रस्तावित 16 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए इतने ही पेड़ों को काटे जाने की योजना थी. एनजीटी ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को भी दोहराया, जिसके तहत किसी भी तरह की कटाई या छंटाई से पहले एनजीटी की समिति की अनुमति अनिवार्य है. शहर के पर्यावरणविदों का मानना है कि इस फैसले के साथ यह स्पष्ट संदेश गया है कि अब देश में विकास की राह हरियाली को कुचलकर नहीं, बल्कि उसे साथ लेकर ही तय होगी.

Editor
Author: Editor

Leave a Comment

और पढ़ें