Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

भारतीय परिवार 55% लोन दैनिक जरूरतों के लिए ले रहे, संपत्ति सृजन के लिए नहीं

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

इंदौर 
भारतीय परिवारों पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है। लोग लाइफस्टाइल खर्चों के लिए जमकर कर्ज ले रहे हैं। पर्सनल लोन अब मोबाइल पर एक क्लिक से ही मिल जाता है। नौकरीपेशा लोगों को बैंक प्री अप्रूव्ड पर्सनल लोन ऑफर कर देते हैं। कार लोन भी प्री-अप्रूव्ड ही मिल जाता है। लोन लेना आसान होन से लोगों पर कर्ज तेजी से बढ़ रहा है। कर्ज मार्च 2025 के आखिर तक बढ़कर, जीडीपी के 41.3% पर पहुंच गया है। यह 5 साल के औसत 38.3% से काफी ज्यादा है और पिछले तीन साल से लगातार बढ़ रहा है।

खपत से जुड़ा कर्ज तेजी से बढ़ रहा

परिवारों के कर्ज में हुई वृद्धि में खपत से जुड़े कर्ज ने अहम भूमिका निभाई है। यानी भारतीय परिवार संपत्ति सृजन के लिए नहीं, बल्कि अपनी दैनिक जरूरतें पूरी करने के लिए ज्यादातर कर्ज ले रहे हैं। RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के अनुसार, कर्ज में बढ़ोतरी के बावजूद भारतीय लोगों पर कर्ज ज्यादातर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम है। भारतीय परिवारों की उधारी में ज्यादातर गैर-आवास खुदरा ऋण यानी क्रेडिट कार्ड कर्ज, पर्सनल लोन और ऑटो लोन आदि शामिल हैं।

इन कर्जों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा

परिवारों की कुल उधारी में पर्सनल लोन, ऑटो लोन और क्रेडिट कार्ड कर्ज की हिस्सेदारी 55.3% है। इसकी हिस्सेदारी पिछले 5 साल में लगातार बढ़ी है। 2020 में इसकी हिस्सेदारी 43% थी। खपत से लोन की वृद्धि दर लगातार होम लोन, कृषि और बिजनेस लोन को पीछे छोड़ रही है। यानी भारतीय परिवारों की ओर से लिए गए लोन में खपत के मकसद से लिए गए कर्ज का हिस्सा सबसे ज्यादा है। उसके बाद संपत्ति सृजन और उत्पादन के उद्देश्य का स्थान आता है। कुल कर्ज में होम लोन की हिस्सेदारी 28.6% और कृषि व बिजनेस लोन की हिस्सेदारी 16.1% है।

क्या है ग्रॉस डिस्पोजेबल इनकम?

ग्रॉस डिस्पोजेबल इनकम (GDI) का मतलब वह आय है, जो देश के निवासियों के पास सही मायने में खर्च करने या बचाने के लिए उपलब्ध है।

कर्ज के साथ बचत भी बढ़ी

रिपोर्ट में कहा गया है कि परिवारों की वित्तीय बचत वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में सुधर कर जीडीपी का 7.6%, हो गई है। लोगों को बढ़ती महंगाई से थोड़ी राहत मिलने के कारण भारतीय परिवारों की बचत में इजाफा हुआ है, जो 2022-23 में कई वर्षों के निचले स्तर पर आ गई थी। परिवारों की देनदारियां बढ़ने के बावजूद घरेलू सकल वित्तीय बचत बढ़कर 11.2% हो गई।

Editor
Author: Editor

Leave a Comment

और पढ़ें