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पंजाब सरकार ने कैदियों को नहीं दी माफी, विधानसभा कमेटी में उठाई मांग

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लुधियाना.

पंजाब विधानसभा की शेड्यूल्ड कास्ट,शेड्यूल्ड ट्राइब्स व बैकवर्ड क्लास के वेलफेयर के लिए बनी कमेटी ने ताजपुर रोड की सैट्रल जेल, ब्रौस्टल जेल व महिला जेल, का निरीक्षण किया। और कैदियों/हवालातियों को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लिया। कैदियों ने कमेटी को बताया कि उन्हें लंबे समय से माफी नहीं मिली है। इसलिए माफी दी जानी चाहिए। जेलों की बैरको, किचन,खाने की सर्विस, टॉयलेट,साफ-सफाई व दूसरी सुविधाओं का अच्छी तरह से निरीक्षण किया। उन्होंने जेलों के अंदर किचन के खाने का स्वाद भी चखा।

शऔर कैदियों से बातचीत की। उन्होंने साफ़-सफ़ाई बनाए रखने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।खासकर किचन में,जहाँ उन्होंने खुद कैदियों/हवालातियों को दिए जाने वाले खाने की क्वालिटी और सफ़ाई की जाँच की।उन्होंने जेल हॉस्पिटल का दौरा किया। ओएटी क्लिनिक,एच आई वी, टीबी के इलाज के लिए एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी आर्ट व काउंसलिंग प्रोग्राम जैसी मेडिकल सर्विस के बारे में पूरी जानकारी एकत्रित की। उन्होंने कैदियों के लिए काफ़ी वॉशरूम और उनकी रेगुलर सफ़ाई और मेंटेनेंस की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।जेल के आस-पास के इंडस्ट्रियल एरिया को ध्यान में रखते हुए, चेयरपर्सन ने उस इंडस्ट्री में इस्तेमाल हो रहे कैमिकल की पहचान करने और डिज़ास्टर की तैयारी के हिस्से के तौर पर उनके एंटीडोट्स आदि जैसे इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्लान का पता लगाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।उन्होंने बेकरी, बढ़ईगीरी,वेल्डिंग, पावरलूम, बुनाई लकड़ी का काम और टेलरिंग वर्कशॉप जैसे वोकेशनल सेक्शन का भी दौरा किया।

उन्होंने सीसीटीवी कंट्रोल रूम और दूसरी मनोरंजन की जगहों का भी इंस्पेक्शन किया। जेल अधिकारियों ने उन्हें कैदियों के स्किल डेवलपमेंट के लिए उपलब्ध अलग-अलग इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (आईटीआई) कोर्स के बारे में बताया।जेल अधिकारियों के साथ कमेटी सदस्यों ने एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसीजर का रिव्यू किया।और प्रोसेस को आसान बनाने के लिए निर्देश दिए।ताकि यह पक्का हो सके। कि कैदी/हवालाती तय प्रोटोकॉल के मुताबिक अपने परिवार वालों से मिल सकें।कमेटी के दूसरे सदस्यों ने महिला जेल की कैदियों से बातचीत की। और उनसे जेल हॉस्पिटल में दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं,परोसे जा रहे खाने और उनकी कोर्ट में चल रहे केस के बारे में जानकारी ली।उन्होंने जेल के कैदियों को बताया कि जो कैदी अपने केस के लिए खुद वकील नहीं रख सकते, वह जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी,से निशुलक कानूनी सहायता ले सकते हैं। उन्होंने जेल के कैदियों से कहा कि निशुलक लीगल एड लेने के लिए वह जेल में खुले लीगल एड क्लिनिक में जाकर लीगल एड फॉर्म भर सकते हैं।

विधानसभा कमेटी ने आगे बताया कि महिला जेल की कैदियों/हवालातियां के अधिकारों का ध्यान रखा जाए।चेयरपर्सन व कमेटी मेंबर्स ने महिला जेल में महिला कैदियों के साथ रह रहे छोटे बच्चों से भी मुलाकात की। उन्हें पढ़ाई के लिए मोटिवेट किया।चेयरपर्सन व कमेटी मेंबर्स ने जाने से पहले जेल के विजिटर्स रजिस्टर में अपने सुझाव भी लिखे।इस अवसर पर असिस्टेंट कमिश्नर (जनरल) और सब डिविजनल मजिस्ट्रेट श्रीमती पायल गोयल, एडीजीपी (जेल) श्री अरुण पाल सिंह, डीआईजी पटियाला सर्कल (जेल)एसएस मंड,सेंट्रल जेल के सुपरिटेंडेंट कुलवंत सिंह सिद्धू,डिप्टी जेल सुपरिटेंडेंट हरबंस सिंह, ब्रौस्टल जेल के सुपरिटेंडेंट गुरप्रीत सिंह, महिला जेल के सुपरिटेंडेंट दलबीर सिंह काहलो,डिप्टी जेल सुपरिटेंडेंट रवनीत कौर के अतिरिक्त जिले के सिविल व पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन के दूसरे अधिकारी भी मौजूद थे।

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Author: Editor

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