ऑपरेशन ‘सिंदूर’ पर भारत–पाकिस्तान के रिश्तों में फिर उबाल, दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की तीखी प्रतिक्रिया से तनाव गहराया

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नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के शीर्ष रक्षा नेतृत्व द्वारा दिए गए बयानों ने माहौल को ऐसा बना दिया है, मानो कूटनीतिक मोर्चा किसी भी समय सैन्य बहस में बदल सकता है।

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केरल में आयोजित एक सैनिक सम्मान सम्मेलन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि पाकिस्तान ने दोबारा कोई अवांछित कदम उठाया, तो भारतीय सेना की कार्रवाई पहले की तुलना में “कई गुना तीव्र और अभूतपूर्व” होगी। उन्होंने पहलगाम में हुए उस हमले को याद किया, जिसने मई 2025 में पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। इस हमले में धार्मिक पहचान पूछकर पर्यटकों को निशाना बनाया गया, जिसके बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इसे आतंकी संगठन–आधारित पाकिस्तान समर्थित कार्रवाई माना था।

इसी घटना के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ढांचों को निशाना बनाते हुए जिस जवाबी कार्रवाई को अंजाम दिया, उसे आधिकारिक तौर पर ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह ऑपरेशन भारत की नई सुरक्षा नीति का प्रतीक है—जहाँ खतरे का जवाब तुरंत और प्रभावी ढंग से दिया जाता है।

भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने हाल ही में एक समारोह में यह खुलासा भी किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना समुद्री हमला शुरू करने से सिर्फ कुछ मिनट दूर रह गई थी। उनका यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि स्थिति बीते वर्ष कितना तनावपूर्ण हो चुकी थी। नौसेना प्रमुख के अनुसार, उस समय पाकिस्तान की ओर से युद्धविराम का अनुरोध आया, जिसके बाद कार्रवाई रोकी गई।

पाकिस्तान ने राजनाथ सिंह के इन बयानों का कड़ा जवाब दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाज़ा आसिफ़ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत के बयान “ताक़त का प्रदर्शन नहीं बल्कि रणनीतिक घबराहट की निशानी” हैं। उन्होंने पहलगाम हमले को “फ़ॉल्स फ़्लैग” बताते हुए दावा किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस आरोप को साबित नहीं कर पाया। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब पाकिस्तान अपनी आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक दबावों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमित प्रभाव के बावजूद खुद को क्षेत्रीय बहसों में मुख्य भूमिका में दिखाने की कोशिश कर रहा है।

ख़्वाज़ा आसिफ़ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की सेना किसी भी स्थिति के लिए तैयार है और भविष्य में किसी हमले की स्थिति में प्रतिक्रिया “पहले से अधिक कठोर” होगी। साथ ही उन्होंने परमाणु–संपन्न देशों के बीच युद्ध की संभावना को खतरनाक बताते हुए कहा कि भारत को अपने कूटनीतिक तनावों का समाधान बाहर खोजने के बजाय भीतर तलाशना चाहिए।

भारत–पाक तनाव नया नहीं है, लेकिन इस बार जिस तरह से बयानों का आदान–प्रदान हुआ है, उससे यह साफ़ है कि दोनों देशों की राजनीतिक नेतृत्व अपने-अपने घरेलू हितों को ध्यान में रखते हुए कठोर भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा चुनावी विमर्श का बड़ा मुद्दा रही है, वहीं पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन और कमजोर आंतरिक हालात के बीच भारत विरोध एक स्थायी राजनीतिक औज़ार की तरह इस्तेमाल होता रहा है।

हालाँकि कूटनीतिक गलियारों में यह उम्मीद अभी भी कायम है कि बयानबाज़ी वास्तविक सैन्य टकराव में तब्दील नहीं होगी। पिछली कई घटनाओं ने दिखाया है कि दोनों सरकारें सार्वजनिक रूप से कठोर रुख अपनाने के बावजूद पर्दे के पीछे संवाद बनाए रखती हैं ताकि हालात नियंत्रण से बाहर न जाएँ।

लेकिन इस बार विशेषज्ञ मानते हैं कि पहलगाम हमले की बरसी, बदलते भू–राजनीतिक समीकरण और सैन्य नेतृत्व के खुलासों ने तनाव को और संवेदनशील बना दिया है। ऑपरेशन सिंदूर पर जारी बहस आगे चलकर दोनों देशों के रिश्तों को किस दिशा में ले जाएगी, यह आने वाले हफ्तों में ज्यादा स्पष्ट होगा।

समाचार संकलन : युवराज कुमार (प्रशिक्षु, मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़)

YUVRAJ KUMAR
Author: YUVRAJ KUMAR

प्रशिक्षु, मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़

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